कुछ तो शर्म करो, मालिक!

कुछ तो शर्म करो, मालिक!‎

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नायक, भारत के नायक का भी पहला और ‎आखिरी ‎गुण होता है न्याय के प्रति ‎‎आग्रहशील स्वभाव। ‎न्याय-‎विमुख व्यक्ति तात्कालिक रूप से ‎चाहे ‎‎जितना ‎शक्तिशाली हो जाये मिलनसारी संस्कृति से ‎‎संपन्न भारत का ‎नायक नहीं हो ‎सकता ‎है। ‎
अनंत महाराज (नागेंद्र रॉय) पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले के रहने वाले हैं।  ‎कूचबिहार-दिनहाटा इलाके से जुड़े नेता माने जाते हैं। वे भारतीय जनता पार्टी ‎के सांसद (राज्यसभा) ‎ भी हैं। ‎
उनकी एक क्लिप काफी वायरल है। जंतर-मंतर पर छात्रों का धरना-प्रदर्शन-‎घेराव अपने शिखर पर था। लेकिन 20 जुलाई 2026 का संसद मार्च होना अभी ‎बाकी था। देश की राजनीतिक परिस्थिति काफी उत्ताल थी। उस के ठीक पहले ‎‎19 तारीख को भारतीय जनता पार्टी के ये सांसद ने नेता जी सुभाषचंद्र बोस ‎और आजाद हिंद फौज को लेकर बहुत ही आपत्तिजनक बयान दिया है।  ‎
‎19 जुलाई 2026 को अनंत महाराज (नागेंद्र रॉय) ने कूचबिहार के दिनहाटा में ‎एक कार्यक्रम में नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज पर टिप्पणी ‎करते हुए कह दिया — ‎
‎— “क्या नेताजी के पिता के पास कोई सत्ता थी, या वो ‎खुद आजाद हिंद फौज ‎बना रहे थे? ‎वो सभी असल में ब्रिटिश सेना के भारतीय सैनिक ‎थे। जर्मनों ने उन ‎सैनिकों को बंदी बनाया और बाद में ‎नेताजी को सौंप दिया। नेताजी ने उस मौके ‎का ‎सरासर गलत इस्तेमाल किया।”‎
क्या सत्ता के मद में भारतीय जनता पार्टी और इन के नेतागण एकदम से बौरा ‎गये हैं! देश के आदर्श नेताओं और इतिहास नायकों का सरेआम अपमान कर रहे ‎हैं! यह कोई साधारण बात है? बिल्कुल नहीं। ‎
असल में आजादी के आंदोलन में आरएसएस के मनोभाववाले शामिल ही नहीं ‎थे। इसलिए आजादी के आंदोलन के नेताओं और नायकों में से किसी को भी ‎हड़पने की कोशिश में आरएसएस को लोग लगे रहते हैं। ‎
भारतीय जनता पार्टी ने सरदार वल्लभभाई पटेल के साथ किया लेकिन ‎कामयाबी न मिली! सत्ता में आने के बाद यही काम नेता जी सुभाषचंद्र बोस के ‎संदर्भ से करना शुरू किया जाने लगा था — इन की जवाहरलाल नेहरू नेहरू ‎बनाम नेता जी सुभाषचंद्र बोस की ‘राजनीति’ को लोग अभी भूले नहीं हैं! इस ‎में भी कामयाबी नहीं मिली तो अब खुलेआम अपमान पर उतर आये लगते हैं। ‎
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अंतरमन में भी ‘सैन्य संगठन’ की बड़ी लालसा रही है ‎‎— आजाद हिंद फौज की जगह हिंदू सेना! अब तो इस तरह की लालसाओं का ‎विस्तार हिंदुत्व की राजनीति करनेवाली सभी संस्थाओं तक हो गया है।  ‎लालसाओं के मारे ये आजाद हिंद फौज का अपमान करने लगे हैं! ‎
अब भारत के देन और साधारण लोगों को यह बात चुभने लगी है कि भारतीय ‎जनता पार्टी के लोग बिना कुछ सोचे-समझे जब-न-तब, किसी भी बहाने किसी ‎का भी, अपमान करने से बाज नहीं आते हैं! ‎
अभी 8 अगस्त 2026 को कांग्रेस अध्यक्ष हल्द्वानी के रामलीला मैदान में ‎कार्यक्रम में शामिल हुए थे। बाद में पता चला कि हिंदुत्व की राजनीति की सेवा ‎में लगे लोगों ने वहां तथाकथित शुद्धिकरण का अपमानजनक तरीके से ‎राजनीतिक ताम-झाम किया। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं का ‎राजनीतिक ताम-झाम कब संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करता है, कब ‎सामाजिक और संवैधानिक अपराध में बदल जाता है, उन्हें पता ही नहीं चलता ‎है। जिन्हें पता चलता है, वे छूटते ही कह बैठते  हैं कि भारतीय जनता पार्टी ऐसी ‎किसी कार्रवाई को सब्सक्राइव नहीं नहीं करती है — ऐसा ही कुछ तो राज्यसभा ‎में मल्लिकार्जुन खरगे की दहाड़ पर जगत प्रकाश नड्डा ने कहा था! ‎
सवाल यह नहीं है कि भारतीय जनता पार्टी क्या सब्सक्राइव करती हैं और क्या ‎सब्सक्राइव नहीं नहीं करती है। मूल बात यह है कि भारत का संविधान इस तरह ‎की आपराधिक कार्रवाई को सब्सक्राइव नहीं करती है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक ‎गठबंधन (एनडीए) में भारतीय जनता पार्टी ‎ही सरकार चला रही है तो उसे इस ‎पर गहन कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए — यह कोई चाय-चकल्लस पर हुई ‎घटना नहीं है। ‎
लेकिन यहां तो गहन कार्रवाई सिर्फ मतदाता सूची पर होती है, मतदाताओं और ‎नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर हमला करनेवाले पर कोई गहन कार्रवाई नहीं ‎होती है! तो सवाल यह है कि सरकार ऐसी घटना पर सरकारी एजेंसियों को क्या ‎करने और क्या न करने की हिदायत देती है। भले ही संसद में दोनों हाथ उठाकर ‎जगत प्रकाश नड्डा सब्सक्राइव न करने की बात कही हो लेकिन दुनिया जानती है ‎कि भाजपा सब्सक्राइव करे-न-करे प्रिस्क्राइब खूब करती हैं। ‎
देखा जाना चाहिए कि अब नेताजी सुभाष चंद्र बोस, आजाद हिंद फौज, ‎मल्लिकार्जुन खरगे और इस तरह से लोगों के ‎अपमान पर सरकार का रुख और ‎रवैया क्या रहा है। ‎
नायक, भारत के नायक का भी पहला और ‎आखिरी ‎गुण होता है न्याय के प्रति ‎‎आग्रहशील स्वभाव। ‎न्याय-‎विमुख व्यक्ति तात्कालिक रूप से ‎चाहे ‎‎जितना ‎शक्तिशाली हो जाये मिलनसारी संस्कृति से ‎‎संपन्न भारत का ‎नायक नहीं हो ‎सकता ‎है। ‎आप क्या कहते हैं! ‎