फिर भी अफवाह है



फिर भी अफवाह है


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सचमुच कितना प्यारा था हमारा अतीत
प्रकृति के किसी विकासवादी चरित्र ने
हम से हमारी दुम छीन ली

अभिशप्त आदमी कितना असहाय है आज
दुम के बिना
अब तो वह सड़े मुहावरे की कृपा से ही
दुम हिला पाता है
भाषा के ही मार्फत
दुम दबा पाता है

इस समय जबकि दोनों मुहावरों के बीच
रणनीतिक समझदारी और सहयोग
जरूरी है दाल रोटी के लिए, यानी
दुम हिला-हिलाकर दबाने
दुम दबा-दबाकर हिलाने की जरूरत है
आदमी के पास दुम ही नहीं है!

व्याकरण का मास्टर
बच्चों को मुहावरे का अर्थ
बताता है बहुत ही विचित्र ढंग से

अब अगर दुम होती तो ड्रील मास्टर
दुम हिलाने और दबाने
हिला-हिलाकर दबाने
दबा-दबाकर हिलाने के
कर्मयोग का अभ्यास कराता
राष्ट्रीय दुम चैंपियन, राष्ट्रीय दुम-श्री के
खिताबों का प्रावधान होता
अफसोस, आदमी के पास दुम ही नहीं है!

फिर भी अफवाह है कि
कुछ सफल लोगों के पास दुम है!

पीली धूप



पीली धूप

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आज फिर धरती पर फैल गई पीली धूप
पाखी सब उड़ गये, घोंसले सब खाली हैं

बहेलियों के स्वागत में मचल रही
धरती की छाती पर आज फिर पीली धूप

माटी फिर निर्गंध बनी
हवा फिर महक रही
दूब के माथे पर नाच रही पीली धूप
आज फिर धरती पर फैल गई पीली धूप

आँख बोलती है



आँख बोलती है

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मैं देखता हूँ और सोचता हूँ
मैं सोचता हूँ और देखता हूँ
मैं चाँद से लिए गये
धरती के चित्र देखता हूँ

मैं देखता हूँ और सोचता हूँ
गिद्धों की नजर में धरती क्या है
मैं गिद्ध-दृष्टि से धरती को जानना चाहता हूँ
ताकि जाना जा सके, पहले इसके कि
गिद्धों की मंडली टूट पड़े धरती पर
बचाव में क्या कुछ किया जा सकता है

मैं पूरी-की-पूरी धरती को
आँखों में समा लेना चाहता हूँ
सुना है, मरने के बाद भी आँख बोलती है

मैं चाँद से लिए गये
धरती के चित्र देखता हूँ
मैं देखता हूँ और सोचता हूँ
मैं सोचता हूँ और देखता हूँ