क्या मुश्किल है मिलना, एक बूँद आँसू और उसके भीतर हँसती हुई गंगा

आज रात भोलेनाथ सपने में आये
चेहरा उदास, नाग निस्तेज ▬ बोले
विद्यापति मिले नहीं! सो, मैं तुम से कुछ कहने आया हूँ
मेरा एक भक्त दसो इंद्रिय को मेरी दसो दिशाओं को समर्पित कर
मेरा धनुष माँग ले गया, ज्ञानी था पर अब उसे क्या खबर कि
धनुष किसी का हो उसके साथ अहं तो लिपटा ही रहता है
ले नहीं जा पाया अपने मकाम तक बीच में छोड़ देना पड़ा
आगे जानते ही हो कि एक धनुर्धारी ने
समता की सीता की प्रेरणा और भवानी की सम्मति से
मेरे धनुष को तो तोड़ डाला, लेकिन अपना छोड़ नहीं पाया
मेरा धनुष क्या टूटा कि क्रुद्ध गंगा जटा तोड़कर निकल पड़ी
मुझे भोला कहते हैं, लेकिन यहाँ के लोग खुद कितने भोले हैं
मुझे प्रसन्न करने के लिए, क्रुद्ध गंगा को जलपात्रों में भर
मेरी जटाओं तक ले आने की कोशिश करते हैं
भोले समझ नहीं पाते!
गंगा क्रुद्ध हो तो मैं कैसे प्रसन्न हो सकता हूँ

खैर छोड़ो सपनों में अधिक देर तक मेरा टिकना संभव नहीं है
लोगों से कहना, आँसू की किसी एक बूँद को मुझ तक ले आये
लेकिन आँसू सच्चा हो, सुना है बाजार में पाउच में आँसू बिकते हैं
पहले मेरी दो आँखों में आँसू थे, एक में आग थी, संतुलन था
आजकल तीनों आँख में आग-ही-आग है, जलन बहुत है
कितना त्रासद है आज-कल शमन नहीं है शंभु के पास
एक बूँद आँसू, हाँ एक बूँद आँसू और उसके भीतर हँसती हुई गंगा
ले आये कोई कहीं से यह पवित्रता, तो बचे यह सृष्टि

चले गये भोलेनाथ!
और मैं उखड़ी हुई नींद में
फटे हुए सपनों को सीने की कोशिश में लगा रहा

विद्यापति मिले नहीं!
ग़लिब के आगे कलीसा तो था, पता नहीं खुद कहाँ हैं इन दिनों!

अब किस से कहूँ ये बात, चलिये आप से ही कहता हूँ
न कहने के दोष से मुक्त होने के लिए मैं आप से ही कहता हूंँ
किसी को मिले कहीं अगर एक बूँद आँसू,
हाँ एक बूँद आँसू और उसके भीतर
हँसती हुई गंगा मिले तो भोलेनाथ को खबर करे
हे प्रिय! भोलेनाथ बहुत विश्वास के साथ आये थे
इस विश्वास के साथ कि
मैं लोगों तक और खासकर कवियों तक संदेश पहुँचा दूँगा

सब मिलकर खोजें तो क्या मुश्किल है
मिलना एक बूँद आँसू और उसके भीतर हँसती हुई गंगा
या फिर मिलना विद्यापति का या ग़ालिब का
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