भूख है दरम्याँ सियासत नहीं

जी बुरा मान जाना, मान जाने की शुरुआत है
जुबाँ पर न सही, आँखों में भी है कोई बात है


अब बुरा सही माना है यह भी तो एक बात है
कल तक तो कुछ भी मानते न थे क्या बात है

कही खूब, सुनी किसने जो बात है सो बात है
ये भी है, है वह भी है मान जाइये कोई बात है

नादान न सही संगो-खिस्सत जैसी कोई बात है
सदियों से आई महज अफवाह नहीं कोई बात है

सब कुछ महफूज नहीं है जो वह मेरी औकात है
भूख है दरम्याँ सियासत नहीं यह तो एक बात है
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