रविवार, 3 मार्च 2013

प्रफुल्ल कोलख्यान की कुछ कविताएँ.


अच्छे शब्द दो

एक अच्छी कविता के बारे में
सोचते हुए
मैं आपके बारे में
सोचने लगता हूँ

आपके बारे में
सोचते हुए मैं
एक अच्छी कविता के बारे में
सोचने लगता हूँ

अच्छे आदमी
और अच्छी कविता के बारे में
सोचते हुए मैं अक्सर
शब्दों से इतर
सोचने लगता हूँ

हे अच्छे लोगो!
हमें अच्छे शब्द दो

प्रदूषित भाषा के
दूषित शब्दों से
नहीं लिखी जा सकती अच्छी कविता

और
अच्छी कविता के बिना
नहीं जी सकता अच्छा आदमी

इसलिए
हे अच्छे लोगो!
हमें अच्छे शब्द दो
कोयले की तरह---- दहकते हुए!
  

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