गुरुवार, 22 दिसंबर 2016

अंधा प्रकाश

जोरशोर से कही बात
सुनाई नहीं देती है
बहुत तीखी है
तेरी फुसफुसाहट

अंधा बना देता है
प्रकाश! अंधा प्रकाश!!
जो प्रकट है वह
दिखाई नहीं देता
जैसे कि कपट

➖ मैं तुम्हारे तिलस्म को
भीतर से जानता हूँ वामदेव
➖ यह भी कि उनके भीतर
कुछ है ही नहीं

तो कान आँख दोनो ही गये मनुआ भया उदास
अभी वक्त लगेगा लाइलाज नहीं यह जो है एहसास

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