मैजिक मेरी जान, लॉजिक नहीं

मैजिक मेरी जान, लॉजिक नहीं
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ये जो दुनिया है
मैजिक से चलती है
मैं लॉजिक की तलाश करता रहा

पड़पीड़न में जो मजा है वह ब्लैक मैजिक है
मुहब्बत में जो मजा है वह
पिंक मैजिक है
इलेक्शन लड़ने का मजा
लाल मैजिक है
बीमार के चेहरे पर रौनक
येलो मैजिक है

हर रंग में एक मैजिकहै
हर मैजिक में एक रंग है
नहीं नहीं यह कोई
सियासी बात नहीं

बस इतना कि
शब्दों का जादूगर
कवि नहीं होता
अब शब्दों में
कोई लॉजिक बचा नहीं

कवि करे तो क्या करे! कविता!
ओह मुहब्बत!
यह भी तो
मैजिक है मेरी जान, लॉजिक नहीं

वे दिन हवा हुए
कभी लॉजिक का भी अपना मैजिक था
मैजिक को लॉजिक की
जरूरत नहीं थी
जरूरत नहीं थी कि झूठ को
अमूमन किसी की जरूरत
नहीं होती

लेकिन मुझे तुम्हारी जरूरत है
अब लॉजिक हो कि मैजिक हो
मुझे तुम्हारी जरूरत है
कहूँ डेमोक्रेसी तो
खुलकर बिखर जायेंगे
बिखरी अलकें ज्यों तर्कजाल
बुरा मान जायेंगे
महा कवि जयशंकर प्रसाद

जोखिम उठाता हूँ कह देता हूँ डेमोक्रेसी
कोई लॉजिक नहीं, बस मैजिक

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