गुरुवार, 2 मार्च 2017

भाषा का भिखारी

भाषा का भिखारी!
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तू कैसा है रे! परफूल!
भाषा का भिखारी!
न तेरा कोई
अपना जनपद है!
न कोई जमीन है!
जमीर?
चल! उस पर
फिर बात कर लेंगे।

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