बुधवार, 5 जुलाई 2017

इंतज़ार बचा रहे

यही तो है जिंदगी
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चाहे जितना भी
खतरनाक हो मौसम
फूल के खिलने,
मुस्कुराने पर ऐतबार बचा रहे
चाहे जैसा भी हो
आसमान का तेवर
पंछियों में उड़ान के
हौसले पर यकीन बना रहे
नमक से दाल की हो
जितनी भी दूरी
पसीने को नमक की ताकत पर
अंत तक भरोसा कायम रहे
भाषा में हो जितना भी
अर्थ संकोच
कविता में
संभावनाओं का आँचल
प्यार से पसरा रहे
चाहे जैसी भी हो जिंदगी
पर रौनक की राह रहे
बस यही तो है,
यही तो है जिंदगी,
यही है जिंदगी
यह मौसम मुहब्बत का नहीं है
चाहे जितनी बार कहे कोई
तेरी निगाह में में
मेरे इंतजार का घर बसा रहे!

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