न थी

भाषा बेजुबान और आंख इतनी बेआवाज़ तो पहले न थी
हालात जैसे भी थे चेहरे पर मुस्कान इतनी नाकाम न थी
सड़क पर इंतजाम, इतना कुछ उसकी जिंदगी में भी न था
फलसफा बेआबरू कि जंग में शामिल मेरा गांव क्यों न था! 



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