भरें, किसी और ही का खजाना

प्रफुल्ल कोलख्यान Prafulla Kolkhyan

दो चार बातें मुहब्बत की फिर औकात बताना
छाता खोलकर, बरसात में जी, भरकर नहाना


छाता-बादल को तेरा इरादा समझ में न आना
हाय रे हाय, यह आया देखो अब कैसा जमाना

बड़ी घटना है इस दिल का धर्मशाला हो जाना
सिले दीवार पर, जले काठ से नाम लिख जाना

बात मेरी थाली की जो करें वो साहिब रोजाना
और नीतियों से भरें, किसी और ही का खजाना

दोस्तों के अंदाज में है अब तो कम ही दोस्ताना
हाय, कातिल का अंदाज! है कितना कातिलाना



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Ranjit Kumar Sinha, Pankaj Jain, Kumar Sushant और 9 अन्य को यह पसंद है.
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