गुरुवार, 6 अगस्त 2015

ये क्या कह गये!

ये क्या कह गये!
खुद ईश्वर को
ईश्वर का वरदान
कह गये!

और पूँजी!
ये क्या कह गये!!

खैर प्रभु की मर्जी
मालिक जो कह गये
सो कह गये!

अच्छे दिनन का फेर!
जी अच्छे दिन का फेर मालिक
अब जो रहे आँख तेरेर मालिक
जी ज्ञानी रहे कोई या रहे अज्ञानी
सब तेरे आगे भरे, चलनी में पानी
गंगा जमुना में पानी रहे या न रहे
प्रभु इच्छा मालिक की नादानी रहे! 

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