बादल मेरी आँख उधार ले गया है

प्रफुल्ल कोलख्यान Prafulla Kolkhyan

है बारिश में भीगने की तमन्ना, उनको मुबारक
हो खबर कि बादल मेरी आँख उधार ले गया है

बिजलियाँ तड़पती हैं, ये तड़प उनको मुबारक
हाँ मौसम विभाग का हाकिम पगार ले गया है


अब बूँदों का पत्थर पर गिरना उनको मुबारक
हल-बैल खेत में हाँक कर, दिलदार ले गया है

हर चीज में है पानी की चमक उनको मुबारक
आँख का पानी तो छीनकर, बाजार ले गया है

गर्मी का मौसम, पुरजोर ठंढक उनको मुबारक
मिस्त्री की जेब काटकर, तो औजार ले गया है

लंबा-चौड़ा बैलेंस शीट है, जो उनको मुबारक
सच हमारा अमन चैन तो, जयकार ले गया है

है बारिश में भीगने की तमन्ना, उनको मुबारक
हो खबर कि बादल मेरी आँख उधार ले गया है

एक टिप्पणी भेजें