शनिवार, 27 सितंबर 2014

तेरे खासमखास होने से बेहतर आम होना है

प्रफुल्ल कोलख्यान Prafulla Kolkhyan

बदकलामी से बेहतर तो खुदकलाम होना है
तेरे खासमखास होने से बेहतर आम होना है

दिल बेकाबू तो बेहतर मुँह में लगाम होना है
किया कुछ नहीं, कैसे बेहतर अंजाम होना है 


यही बेहतर जो इस तरह उम्र तमाम होना है
बदगुमां है, और क्या बेहतर इंतजाम होना है

जब मर्ज मर्जी में, क्या बेहतर आराम होना है
इस मकबूलियत से, तो बेहतर गुमनाम होना है

तेरी खामोशी से बेहतर सुबह का शाम होना है
पानी बिके नदी का क्या बेहतर उद्दाम होना है

बदकलामी से बेहतर तो खुदकलाम होना है
तेरे खासमखास होने से बेहतर आम होना है
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