लगती नहीं पाबंदी


कभी जो लबों को बोलने की नहीं होती आजादी
मगर आँखों की हलचल पर, लगती नहीं पाबंदी

बेकरारी न दिखे आँखों की होती नहीं जमाबंदी
सूरज के बिना खिलती नहीं दीये की खुदाबंदी

रोशनी का हुनर है जो होती नहीं उसकी किलाबंदी
राजनीति की है जरूरत मगर है ये चीज बहुत गंदी

अदब में रोड़ा बहुत बचने में इन से नहीं अक्लमंदी
सरहद पर शैतान, जरूरी है हद के अंदर भी लामबंदी

किस तरह से कौम की तौहीन करती है खेमाबंदी
इतराइये जरूर हर भेद खोल के रख देगी लेखाबंदी

आँखों में आँसू हैं सही सपनों की होती नहीं जलबंदी
इसरार महबूब की और कायदे की अपनी समाजबंदी

एक टिप्पणी भेजें