मंगलवार, 28 जनवरी 2014

यह आप ही की लीला है

यह आप ही की लीला है 


यह विडंबना ही है प्रभु
इस पर क्या कहें
सच तो यह है कि इसे
आप से बेहतर तरीके से
कोई कह नहीं सकता

मरते हैं हम जिसके अभाव से
मरते हैं हम उसके अतिरेक से भी
अन्न-जल हो, भजन-कीर्तन या कुछ और हो
हाँ प्रभु!
यही है आपकी लीला!
बचाते हैं जिससे मारते भी उसी से हैं!
और प्रभु, हम समझ ही नहीं पाते हैं
ठीक मरने और बचने के पहले तक कि
हम मारे जा रहे हैं या बचाये!

यह आप ही की लीला है प्रभु, आप ही जानते हैं!
हम क्या कहें... क्या कहें हम कि लोकतंत्र है
और हमें भी कुछ कहना है, कि यह आप ही की लीला है
या यह कहें कि प्रभु कि जो कहना है सो कह दिया! 
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