एक मुकद्दस तलाश जारी है


वैसे कहूँ तो कल की ही बात है, हाँ हाँ कल की ही
चाँद का मुहँ जरूरत से कुछ ज्यादा ही लाल था और खबर फैल गई थी
इस समय जब कि चाँद का मुहँ जरूरत से कुछ ज्यादा ही लाल था
चाँद से कुछ भी पूछना इस मुतल्लिक,
मुमकीन नहीं रह गया था बल्कि अत्याचार था
तालाब पर कभी ठीक से भरोसा मेरा जमा नहीं
और कुएँ को बीच में लाने का सवाल ही नहीं था
मैं लपक कर नदी के पास पहुँचा
गोकि समुद्र तक पहुँचना मेरे बूते में नहीं रहा कभी
मुझे पूरा यकीन था किसी और को हो या नहीं,
नदी के पास रहती है चाँद की पूरी खबर
मैं चकित रह गया कि जहाँ चंचल नदी बहा करती थी कभी मनोरमा
वहाँ अब रेत का हाहाकार बह रहा था,
रेत का हाहाकार यानी शक्ति के शून्य का हाहाकर
गनीमत यह कि एक टूटी नाव थी अब भी वहाँ सिसक के साथ
अपनी सिससक में उसे इंतजार था
नदी के फिर से बहाव में आने की
और चाँद के नदी में उतरने की
हालाँकि उसे खबर नहीं थी चाँद के मुहँ की
मेरी किसी बेचैनी का कोई जवाब नहीं था
न उस सिसक में और न उस इंतजार में
मुझे अपनी गलती का एहसास हो चुका था
और मैं बहुत ही थके मन से लौट रहा था
क्लाइमेट चेंज पर संयुक्त राष्ट्र संघ में किये गये भाषण की वर्त्तनी के पास
मेरे ख्याल में मेरा आशियाना अब तक नाव में बदल चुका था
अब मैं कैसे क्या कहूँ लेकिन यकीन मानिये
मैं अपने आप से लगातार असहमत होता जा रहा था
एक बहुत ही शातिराने तरीके से मैं अपने खिलाफ सहमत होता जा रहा था
अपने आप से असहमत और खुद के खिलाफ शातिराने तरीके से सहमत होना!
बहुत तकलीफदेह होता है,
कोई तरीका होगा जरूर इस फाँस से बाहर निकलने का
फिलहाल तो सुकून के लिए इतना है काफी रेतीली सभ्यता में कि
गुम नदी की मुकद्दस तलाश ऐलानिया तौर पर जारी है
भ्रम हो तो भ्रम ही सही पर एक मुकद्दस तलाश जारी है!!

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