मंगलवार, 19 जनवरी 2016

अफसोस और सिर्फ़ अफसोस के बाहर आज कुछ नहीं

रोहित बेमुला यही नाम है तुम्हारा तुम कभी भुलाये नहीं जाओगे मैं नहीं जानता इस देश का क्या होगा दुखी मैं भी बहुत हूँ, स्तब्ध, बिल्कुल खामोश मुसीबत यह कि मेरा दुख उन लोगों को नौटंकी लगेगा इस मुल्क मेरा हर दुख नौटंकी करार दिया गया है इसलिए कि अंततः हर बार दुख पैदा करनेवालों की कतार में खड़ा कर दिया जाता हूँ कैसे जीत पायेंगे इस लड़ाई को इस देश में ब्राह्मणवाद का मुकाबला ब्राह्मणवाद के हथियार से किये जाने की कोशिश अंततः ब्राह्मणवाद की जीत को ही सुनिश्चित करती है दोस्त ब्राह्मणवाद का हथियार यानी बहिष्करण का जन्मगत आधार वे जो ब्राह्मणवाद के विपरीत खड़े दिखते हैं नव-व्राह्मण ही हैं नव-व्राह्मण हैं इसलिए, हाँ इसलिए इसलिए मेरा हर दुख नौटंकी है जन्म पर न मेरा नियंत्रण न तुम्हारा, लेकिन जन्म ही तो है जो अपने और पराये का आधार मुहैय्या कराता रहा इधर भी उधर भी इधर भी और उधर भी और मौत इस तरह खेल है इधर भी उधर भी मेरा दुख भले नौटंकी लगे इधर भी और उधर भी लेकिन दुखी मैं भी बहुत हूँ, स्तब्ध, बिल्कुल खामोश हाँ जानता हूँ, न इधर हूँ न उधर हूँ अफसोस भीम, अफसोस और अफसोस के बाहर आज कुछ भी नहीं
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