गुरुवार, 15 मई 2014

जो हासिल नहीं, उसके खोने का दर्द

जो हासिल नहीं, उसके खोने का दर्द
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तानाशाह ने लोकतंत्र को देखा
देखा प्यार से
हद हो गई जब
लोकतंत्र ने तानाशाह को देखा
देखा इंतजार से

दोनों की आँख में एक दूसरे की छवि समा गई
सूरज ने आँखें झुका ली और धरती के कान में कहा
तुम्हें पता है कि तुम्हारी संतान ने क्या खोया है ▬▬

जो हासिल नहीं हुआ, उसके खोने के दर्द को
धरती से बेहतर कौन जानता है

धरती ने बस गर्म निगाह से सूरज को देखा


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