हवा बहुत बदनाम है

हवा बहुत बदनाम है
▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬

ठहरी, ठमकी हुई सुबह है, मचलती हुई शाम है।
मालिक, तेरे इस शहर, में हवा बहुत बदनाम है।

जज्वात का रंग गाढ़ा तो है, मगर शब्द बेकाम है।
मालिक, तेरे इस शहर में, मिहनत मगर बेनाम है।

सदियों बहा पसीना, हाँ मगर बच्चा उसका, बेकाम है।
मालिक, तेरे इस शहर में, इधर भूख है, उधर जाम है।

इंतहान में रहे, न समझे वह असल में एक्जाम है।
मालिक, तेरे इस शहर में, हाँ पैसा अब हुक्काम है।

हक्का-बक्का ठिठका खड़ा जो चुचाप, हाँ आवाम है।
मालिक तेरे इस शहर में, फरेब नंगा और आम है।

ठहरी, ठमकी हुई सुबह है, मचलती हुई शाम है।
मालिक, तेरे इस शहर, में हवा बहुत बदनाम है।
एक टिप्पणी भेजें