मौसम, बहुत खराब है

मौसम, बहुत खराब है
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मौसम, बहुत खराब है, तुम न आये, न सही, तुम्हारा ख्याल तो है।
पाँव फैलाने के लिए चादर न सही, मुँह ढकने के लिए रुमाल तो है!

तुम न सही, गुंडों के इस शहर में, आखिर कोई एक कोतवाल तो है।
दाल न सही, नमक तो है, दिशाएँ गुमसुम हैं, मगर दिकपाल तो है!

लोग पूछेंगे तुम्हारे आँसुओं की कीमत बाजार में, ये सवाल तो है।
हाँ, ऊपर-ऊपर हरियाली, मगर भीतर में पक रहा बबाल तो है!

ये बाजार में कोहराम हो चाहे जितना, मगर वह मालामाल तो है।
असली न सही, नकली ही सही जो भी हो, बाजार में उछाल तो है!

मौसम, बहुत खराब है, तुम न आये, न सही, तुम्हारा ख्याल तो है।
पाँव फैलाने के लिए चादर न सही, मुँह ढकने के लिए रुमाल तो है!
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