हमने ऐसा ही जीवन पाया

हमने ऐसा ही जीवन पाया

जब हवा को कोई झोंका परेशान-सा करने लगे
समझ लेना मैं आया था
जब कभी बिजली गुल-सा हो जाये
समझ लेना मेरी ही शरारत है
जब कभी-कभी अकारण छलछला आये आँसू
समझना मैंने तुम्हें याद किया था और रोया था
जब कभी तुम्हारी आँखों के सामने टँगे इंद्रधनु या
जब कभी मेज पर रखे गुलदस्ता में मुस्कुराये फूल
समझ लेना मैंने कुछ कहना चाहा है,
जो आँखों से कहकर भी, मुँह से कह नहीं पाया था

हाँ, मेरे हमसफर जब भी मुझे याद करना
बस इतना ही समझ लेना, बस इतना ही कि
हमने ऐसा ही जीवन पाया था, ऐसा ही है जीवन
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