गुरुवार, 15 अक्तूबर 2015

समझ और ना-समझ

जिसने यह समझ लिया कि कुछ समझ नहीं आया उसके पास समझने की असीम संभावनाएं बची रहती है। जो समझे सब कुछ समझ में आ गया उस के पास समझने की संभावना नहीं बचती है। संभावनाओं का बचा रहना ही ज्ञान को अंधत्व की चपेट से बचाता और उसे नवजीवन प्रदान करता है।

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