सोमवार, 9 जून 2014

पीली धूप



पीली धूप

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आज फिर धरती पर फैल गई पीली धूप
पाखी सब उड़ गये, घोंसले सब खाली हैं

बहेलियों के स्वागत में मचल रही
धरती की छाती पर आज फिर पीली धूप

माटी फिर निर्गंध बनी
हवा फिर महक रही
दूब के माथे पर नाच रही पीली धूप
आज फिर धरती पर फैल गई पीली धूप
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