सोमवार, 2 जून 2014

कातिल से जिरह करेगा! रे तू पागल मकतूल

कातिल से जिरह करेगा! रे तू पागल मकतूल
 ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬
हाँ, बहुत महीनी छाँट लिये, बेटा तुम परफूल।
मोटी-मोटी बात करो अब, मत दुहराओ भूल।
यहाँ लाख टका डोनेशन पर, मिलता है स्कूल।
सच नेशन से बड़ा डोनेशन अब है यही उसूल।
सच कमीशन सच है, मिशन है अब उलजुलूल।

हाँ, बहुत महीनी छाँट लिये, बेटा तुम परफूल।
दवा के साथ, डाकतर भी, बिकता पावरफूल।
रे समय, समाज, सभ्यता, में तू रहा मशगूल।
हुँह, बेमतलब बात पर ही देता रह गया तूल।
जभी बिकेगा, तभी बचेगा, बाकी बात फजूल!

हाँ, बहुत महीनी, छाँट लिये, बेटा तुम परफूल।
उनके सिर बड़ा ताज है और जन, जूते का धूल!
खोज रहा आम! और क्या रोपा, यह गया भूल।
तू कातिल से जिरह करेगा! रे तू पागल मकतूल।
अब जाने क्या, भीतर में जमकर बहुत रहा हूल।
हाँ, बहुत महीनी छाँट लिये, बेटा तुम परफूल!!
मोटी-मोटी बात करो अब, मत दुहराओ भूल!! 
एक टिप्पणी भेजें