सोमवार, 16 जून 2014

आवाज को खामोशी में बदलने और आँख को झुकने से रोको प्रिय

आवाज को खामोशी में बदलने और आँख को झुकने से रोको प्रिय
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मैं खामोश हूँ
जब भी तुम्हारा मुँह खुलेगा
मेरी खामोशी तुम्हारी जुबान पर चढ़कर बोलेगी

मेरी आँख झुकी है
जब भी तुम्हारी नजर उठेगी फलकर पर
तुम्हें मेरे टूटे हुए सपनों की छटपटाहट दिखेगी

मेरी खामोशी, मेरी झुकी हुई निगाह
दूर तक तुम्हारा पीछा करेंगी▬
उस वक्त भी जब तुम आनंद-भोज में शामिल हो रहे होओगे
उस वक्त भी जब तुम श्मसान से खाली पैर लौट रहे होओगे

यह सब पहली बार तुम्हारे ही साथ नहीं होगा
किसी भी अजायब घर में जाकर देख लो जान लो
जिसे नायक मानते हो उनकी तस्वीरों से
उनकी आवाज में एक कशिश है▬
किसी की खामोशी, किसी की झुकी हुई निगाह
दूर तक, अब तक उनका पीछा करती रही हैं
क्योंकि वे किसी की आवाज को खामोशी में बदलने से रोक नहीं पाये थे
क्योंकि वे किसी की आँख को झुकने से रोक नहीं पाये थे
ये गुनाह है, आवाज को खामोशी में बदलने से रोक नहीं पाना
ये गुनाह है, किसी की आँख को झुकने से रोक नहीं पाना

यकीन मानो, मैं जो आवाम हूँ मेरी खामोशी, मेरी झुकी हुई निगाह
दूर तक तुम्हारा पीछा करेंगी▬
उस वक्त भी जब तुम आनंद-भोज में शामिल हो रहे होओगे
उस वक्त भी जब तुम श्मसान से खाली पैर लौट रहे होओगे

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यकीन मानो, मैं जो आवाम हूँ मेरी खामोशी, मेरी झुकी हुई निगाह
दूर तक तुम्हारा पीछा करेंगी▬
उस वक्त भी जब तुम आनंद-भोज में शामिल हो रहे होओगे
उस वक्त भी जब तुम श्मसान से खाली पैर लौट रहे होओगे
 
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