पैदल चलनेवाले जानते हैं यह हुनर

पैदल चलनेवाले जानते हैं यह हुनर

17 जुलाई 2014 पर 08:02 पूर्वाह्न


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घने अंधकार में पैदल चलनेवाले जानते हैं यह हुनर कि कैसे पैर आँख में बदला जाता है।
घने अंधकार में पैदल चलनेवाले जानते हैं यह हुनर कि कैसे आँख के बल चला जाता है।

गृहस्थ जानता है कि जैसा भी हो वक्त का तकाजा पर बचाये रखना आँख को जरूरी है।
ऐ रौशन महबू-ए-हकीकत मैं जानता हूँ, आँखों में तेरी बसावट का होना क्यों जरूरी है।

हाँ पता है, नींद की चादर तानकर सो जाना ख्वाबों के जिंदा रहने की रुहानी ताकत है।
बिना कुछ कहे अपनी रामकहानी बाँचना और सिमटकर तेरा पहलू में आना अदावत है।

घने अंधकार में पैदल चलनेवाले जानते हैं यह हुनर
कि कैसे पैर को आँख में बदला जाता है।
कि कैसे आँख के बल 
चला जाता है।
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