ओफ्फ! आज दूज का चाँद

प्रफुल्ल कोलख्यान Prafulla Kolkhyan

ओफ्फ! आज दूज का चाँद

29 जुलाई 2014 पर 10:18 पूर्वाह्न


दूज का चाँद
जैसे हल्के-से, बहुत हल्के-से
लजाते-लजाते मुस्कुराया हो आसमान
और दिख गये हों तुम्हारे दाड़िम-से दाँत

दूज का चाँद
जैसे हल्के-से, बहुत हल्के-से
आयी हो हवा के संग
रोटी की सोंधी गंध
और सज गई हो माथे पर
तुम्हारे पसीने की दमकती पाँत

ओफ्फ! आज दूज का चाँद
रोती हुई माँ की गोद में
दुधुआ बच्चे की पहली-सी मुस्कान



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Prem Prabhakar, Shiv Shambhu Sharma, Sheel Kumaar और 24 अन्य को यह पसंद है.

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Praphull Jha " दाड़िम-से दाँत" ठेठ मैथिल, आहाँ के गोर लगैत छी
29 जुलाई पर 10:24 पूर्वाह्न · पसंद


प्रफुल्ल कोलख्यान Praphull Jha हमहुँ अहाँ के गोर लगै छी...
29 जुलाई पर 10:26 पूर्वाह्न · पसंद


Ram Murari ओफ्फ! आज दूज का चाँद

रोती हुई माँ की गोद में

दुधुआ बच्चे की पहली-सी मुस्कान...
29 जुलाई पर 10:27 पूर्वाह्न · नापसंद · 3


Javed Usmani बहुत उम्दा
29 जुलाई पर 11:11 पूर्वाह्न · पसंद


Manzar Jameel bahut pyara,maza aa gaya.iss rachna mein bharatiya gaon ki mitti ki sugandh mili.
29 जुलाई पर 11:41 पूर्वाह्न · नापसंद · 1


Alpana Nayak ओफ्फ! आज दूज का चाँद

रोती हुई माँ की गोद में

दुधुआ बच्चे की पहली-सी मुस्कान- Offff ! kahaan se khoj laate hain itne sundar Upmaan ?
29 जुलाई पर 01:13 अपराह्न · नापसंद · 1
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