साभार, प्रेमचंदः गोदान के गाँव और रायसाहब

1. इस पाठ के विजातीय वाक्य/ वाक्यों को चिह्नित करें।
2. इस पाठ का आशय स्पष्ट करें।
3. इस पाठ से संबंधित अन्य प्रासंगिक प्रश्न
उठायें।
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सेमरी और बेलारी दोनों अवध प्रांत के गाँव हैं। जिले का नाम बताने की कोई जरूरत नहीं। होरी बेलारी में रहता है, रायसाहब अमरपाल सिंह सेमरी में। दोनों गाँवों में केवल पाँच मील का अंतर है। पिछले सत्याग्रह-संग्राम में रायसाहब ने बड़ा यश कमाया था। कौंसिल की मेंबरी छोड़कर जेल चले गए थे। तब से उनके इलाके के असामियों को उन से बड़ी श्रद्धा हो गई थी। यह नहीं कि उनके इलाके के असामियों के साथ कोई खास रियायत की जाती हो, या डाँड़ या बेगार की कड़ाई की कुछ कम हो; मगर यह सारी बदनामी मुख्तारों के सिर जाती थी। रायसाहब की कीर्त्ति पर कोई कलंक न लग सकता था। वह बेचारे भी तो उसी व्यवस्था के गुलाम थे। जाब्ते का काम तो जैसे होता चला आया है, वैसा ही होगा। रायसाहब की सज्जनता उस पर कोई असर नहीं डाल सकती थी, इसलिए आमदनी और अधिकार में जौ भर की भी कमी नहीं होने पर भी उनका यश मानो बढ़ गया था। असामियों से वह हँसकर बोल लेते थे। यही क्या कम है? सिंह का काम तो शिकार करना है; अगर वह गरजने और गुर्राने के बदले मीठी बोली बोल सकता, तो उसे घर बैठे मनमाना शिकार मिल जाता। शिकार की खोज में जंगल में न भटकना पड़ता। रायसाहब राष्ट्रवादी होने के पर भी हुक्काम से मेल-जोल बनाए रखते थे। उनकी नजरें ओर डालियाँ और कर्मचारियों की दस्तूरियाँ जैसी की तैसी चली आती थीं। साहित्य और संगीत के प्रेमी थे, ड्रामा के शोकीन, अच्छे वक्ता थे, अच्छे लेखक, अच्छे निशानेबाज। उनकी पत्नी को मरे आज दस साल हो चुके थे; मगर दूसरी शादी न की थी। हँस-बोलकर अपने विधुर जीवन को बहलाते रहते थे।


1. इस पाठ के विजातीय वाक्य है▬▬ जिले का नाम बताने की कोई जरूरत नहीं।


यह निषेधात्मक वाक्य है और एक मात्र वाक्य है जो, दृढ़ आदेशात्मक (कमांडिंग) स्वरूप में है। जिला का नाम बताने की जरूरत क्यों नहीं है! क्या प्रेमचंद जिलावार प्रशासनिक इकाई को, जो मुख्यतः 1857 के बाद हुआ था और गोदानके समय यह प्रशासनिक इकाई ब्रिटिश उपनिवेश का औजार बन गया था, सांस्कृतिक इकाई के रूप में स्वीकृत किये जाने से बचने की जरूरत का संकेत कर रहे थे? मुझे लगता है ▬ हाँ। आप क्या मानते हैं, कृपया बतायें।
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