पलासी में घास

 पलासी में घास
पलासी में बड़े-बड़े मैदान हैं घास के
लहराते हुए घास बड़े डरावने लगते हैं
पलासी को मैंने सपनों में जाना है
कभी वहाँ गया नहीं अपने जाने, लेकिन पलासी
मेरे सपने में बार-बार आ जाया करता है सताने
और मैं बेहद डर जाया करता हूँ
मेरे डर को कोई आश्वासन कम नहीं कर पाता है
संयुक्त राष्ट्र संघ में किये गये 
हिंदी भाषण के निहितार्थ को
अंग्रेजी में समझ लेने पर भी मेरा डर कम नहीं होता है
आँख बंदकर बुद्ध की मुस्कुराहट को याद करता हूँ
फिर भी मेरा डर कम नहीं होता है

मुझे पलासी के घास सबसे अधिक शिक्तशाली लगते हैं
पलासी की उदासी टूटती ही नहीं
एक दिन यह उदासी मुझे जकड़ लेगी
पलासी में बच्चे उदास हैं
पलासी में बूढ़े उदास हैं
पलासी में जवान उदास हैं
नर-नारी,सुबह-शाम पलासी में सभी उदास हैं
सिर्फ घास ही लहरा रहे हैं पलासी में

ट्रेन पर चढ़ते हुए, अखबार पढ़ते हुए
दोस्तों से बतियाते हुए
यहाँ तक कि पत्नी से राशन दुकान और वोटर-कार्ड के बारे में
बच्चों से स्कूल के बारे में जिक्र करते हुए भी
मुझे पलासी के घसियल मैदान को पार करना होता है
मेरी प्रार्थना है जगतपति से
मुझे पलासी से बाहर निकाला जाये
एक टिप्पणी भेजें